छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: असिस्टेंट इंजीनियर भर्ती में पदोन्नति कोटा घटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जूनियर इंजीनियरों (Junior Engineers) को बड़ा झटका देते हुए असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) के पदों पर भर्ती के लिए कोटे के पुनरीक्षण (Revision) को चुनौती देने वाली रिट याचिका को खारिज कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि विभाग की संरचना और आगामी परियोजनाओं की आवश्यकताओं को देखते हुए भर्ती कोटे का निर्धारण करना नियोक्ता का नीतिगत विशेषाधिकार है.

क्या था पूरा मामला

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) में कार्यरत 39 जूनियर इंजीनियरों (याचिकाकर्ताओं) ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के मुख्य अभियंता द्वारा 05 मई 2025 और 22 जुलाई 2026 को जारी उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नति का कोटा 70% से घटाकर 40% कर दिया गया था. इसके अलावा सीधी खुली भर्ती का कोटा 20% से बढ़ाकर 50% और विभागीय भर्ती का कोटा 10% निर्धारित किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने इसके आधार पर 07 अगस्त 2026 को जारी 60 पदों पर सीधी भर्ती के विज्ञापन को भी रद्द करने की मांग की थी.

महाधिवक्ता और वरिष्ठ वकीलों की दलील:

सुनवाई के दौरान शासन और पावर कंपनियों की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि जनरेशन कंपनी के आगामी संयंत्रों (जैसे 2X660 मेगावाट यूनिट्स) और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स के सुचारू संचालन व रखरखाव के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुरूप योग्य ग्रेजुएट इंजीनियरों की आवश्यकता है. ऑल इंडिया ओपन कॉम्पिटिशन के जरिए सीधी भर्ती होने से अधिक उपयुक्त और प्रशिक्षित उम्मीदवार मिल सकेंगे.

अपनी टिप्पणियों में क्या कहा अदालत ने ?

  • नीतिगत मामलों में दखल नहीं

न्यायमूर्ति बिभू दत्ता गुरु की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि प्रशासनिक अधिकारी और नियोक्ता यह तय करने की सबसे अच्छी स्थिति में होते हैं कि संयंत्रों के संचालन के लिए क्या मानदंड आवश्यक हैं. नीतिगत फैसलों में अदालत तब तक हस्तक्षेप नहीं करती जब तक कि वे असंवैधानिक या मनमाने न हों.

  •  पदोन्नति कोई निहित अधिकार नहीं

अदालत ने दोहराया कि केवल पदोन्नति के अवसरों में कमी होने मात्र से किसी कर्मचारी का मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होता है. लोक सेवक के पास केवल प्रचलित नियमों के तहत पदोन्नति पर विचार किए जाने का अधिकार होता है, किसी निश्चित कोटे के हमेशा बने रहने की जिद का नहीं.

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