8 जुलाई को होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, रोजगार, ग्रामीण विकास और नई योजनाओं पर हो सकते हैं बड़े फैसले

 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की अगली कैबिनेट बैठक 8 जुलाई को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली यह बैठक सुबह 11:30 बजे शुरू होगी। बैठक समाप्त होने के बाद उपमुख्यमंत्री अरुण साव मीडिया को कैबिनेट में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी देंगे।कैबिनेट बैठक को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा के साथ महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी मिल सकती है।

पिछली बैठक में ग्रामीण विकास पर सरकार ने लिए थे बड़े फैसले

इससे पहले हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी थी।

125 दिन रोजगार की गारंटी देने वाली नई योजना को मिली मंजूरी

मंत्रिपरिषद ने ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी-जी राम जी योजना छत्तीसगढ़’ के प्रारूप को स्वीकृति दी थी। इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाएगी।योजना के माध्यम से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, ग्रामीण आधारभूत ढांचे का विकास और आजीविका से जुड़े स्थायी रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही ग्राम पंचायत आधारित विकास, विभिन्न विभागीय योजनाओं के समन्वय और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर भी विशेष जोर रहेगा।इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में खर्च वहन करेंगे। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 4 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ से गांवों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

कैबिनेट ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए ‘अटल आजीविका समृद्धि हाट’ योजना को भी मंजूरी दी थी।इस योजना के तहत हथकरघा, सिलाई, बुनाई और हस्तशिल्प जैसे सृजन केंद्र, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, डेयरी, राइस मिल, दलहन और तिलहन प्रसंस्करण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, सोलर ड्रायर, कृषि उपकरण मरम्मत केंद्र, डिजिटल सेवा केंद्र, विपणन और आपूर्ति केंद्र विकसित किए जाएंगे।योजना का संचालन छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन करेगा, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इसकी नोडल एजेंसी रहेगा। इसका उद्देश्य स्थानीय उत्पादन को बाजार उपलब्ध कराना और गांवों में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।

बायोगैस नीति को भी मिली थी स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने ‘छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति 2026’ को भी मंजूरी दी थी। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, नगरीय ठोस कचरा, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों का उपयोग कर कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा।सरकार का मानना है कि इससे अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी और जैव उर्वरकों का उत्पादन बढ़ेगा। ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के अनुसार राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन कम्प्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की क्षमता है। इस नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को सौंपी गई है।

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