धमधा में पपीता संकट: लागत बढ़ी, बाजार ठप, खेतों में उखड़ रही तैयार फसल, किसानों की मेहनत पर पानी फिरा

दुर्गः छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का धमधा क्षेत्र पपीता उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार हालात बेहद चिंताजनक हैं। जहां हर साल हजारों टन पपीता बाजार तक पहुंचता था, वहीं इस बार किसान अपनी तैयार फसल को खेतों में ही नष्ट करने को मजबूर हैं।

तैयार फसल पर ट्रैक्टर, बिक्री न होने से टूटी उम्मीदें

बसनी गांव सहित कई इलाकों में किसान महीनों की मेहनत और लाखों रुपये खर्च करने के बाद तैयार पपीते को उखाड़ रहे हैं। खेतों में ट्रैक्टर इस बार फसल काटने के लिए नहीं बल्कि उसे नष्ट करने के लिए चल रहे हैं। किसानों का कहना है कि लागत लगातार बढ़ी है लेकिन खरीदार न मिलने से स्थिति बिगड़ गई है।

मंडी में खरीदारों की कमी, बाजार तक नहीं पहुंच पाया माल

किसानों के अनुसार इस बार बाहरी राज्यों से व्यापारी बहुत कम पहुंचे। दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े बाजारों तक माल भेजने के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा भी नहीं मिल सकी। चूंकि पपीता जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए उसे लंबे समय तक रोक पाना संभव नहीं रहा।

बढ़ती लागत और बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किलें

किसानों का कहना है कि ड्रिप सिंचाई, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गई है। साथ ही बिजली की अनियमित आपूर्ति और आंधी-तूफान से हुए नुकसान ने सिंचाई व्यवस्था को प्रभावित किया, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई।

जनरेटर से सिंचाई, लेकिन नुकसान नहीं रुका

कई किसानों ने फसल बचाने के लिए डीजल जनरेटर का सहारा लिया, जिससे एक-एक खेत पर भारी खर्च हुआ। बसनी गांव के किसान शेर सिंह के अनुसार केवल कुछ दिनों में ही सिंचाई पर एक लाख रुपये से अधिक खर्च हो गया, लेकिन फसल का उचित दाम नहीं मिल सका।

मजबूरी में खेतों में नष्ट हो रही फसल

बाजार तक समय पर फसल नहीं पहुंच पाने के कारण कई किसानों ने पपीता खेतों में ही नष्ट कर दिया, जबकि कुछ ने उसे पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किया। किसानों का कहना है कि मेहनत और लागत दोनों पूरी तरह डूब गई हैं।

MSP और सरकारी समर्थन की मांग तेज

किसानों का कहना है कि धान जैसी फसलों की तरह बागवानी फसलों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य या गारंटीड खरीद व्यवस्था होनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक ऐसी सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक किसान बाजार के उतार-चढ़ाव के भरोसे ही नुकसान झेलते रहेंगे।

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