15 साल पुराने फर्नीचर घोटाले की जांच में फिर आई तेजी, ACB ने शिक्षा मिशन कार्यालय पहुंचकर खंगाले रिकॉर्ड

सरगुजा। उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में वर्ष 2011-12 के बहुचर्चित फर्नीचर खरीदी घोटाले की जांच एक बार फिर रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम बुधवार को राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय पहुंची और वहां मौजूद दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड की भी गहन जांच शुरू कर दी।

दस्तावेज नहीं मिलने पर सीधे कार्यालय पहुंची जांच टीम

सूत्रों के अनुसार, जांच के लिए जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण एसीबी की टीम ने सीधे संबंधित कार्यालय में पहुंचकर रिकॉर्ड का सत्यापन शुरू किया। टीम फर्नीचर खरीदी से जुड़ी फाइलों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और डिजिटल डाटा का मिलान कर रही है ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

करोड़ों रुपये की अनियमितता के आरोपों की हो रही पड़ताल

वर्ष 2011-12 में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत फर्नीचर खरीदी में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। आरोप था कि खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए करोड़ों रुपये की अनियमितता की गई। शिकायतों के बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और अपराध दर्ज किया गया था।

एफआईआर के बाद वर्षों तक ठंडी पड़ी रही जांच

मामले में पहले पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित भ्रष्टाचार निवारण कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी और मामला वर्षों तक लंबित रहा। अब एसीबी की सक्रियता से जांच में फिर नई गति देखने को मिल रही है।

निजी फर्मों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

प्रारंभिक जांच में विभाग के करीब एक दर्जन कर्मचारियों के साथ कई निजी फर्मों की संलिप्तता की बात सामने आई थी। अब एसीबी पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्यों और डिजिटल डाटा के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खरीदी प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

पुराने रिकॉर्ड से खुल सकते हैं नए राज

जांच अधिकारी दस्तावेजों के मिलान और रिकॉर्ड के सत्यापन के जरिए यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि फर्नीचर खरीदी, भुगतान और स्वीकृति की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई थी या नहीं। माना जा रहा है कि पुराने दस्तावेजों की जांच से मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं, जिससे वर्षों पुराने इस बहुचर्चित घोटाले की जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकती है।

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